
नूरुल इस्लाम मोनी ने पिछली सरकार के समय हुए अनुचित समझौतों का जिक्र किया जिनमें चट्टोग्राम बंदरगाह पर बांग्लादेशी जहाजों के बजाय विदेशी जहाजों को प्राथमिकता देने वाली बंदरगाह नीतियां भी शामिल थीं। BNP के मुख्य व्हिप ने जोर देकर कहा कि भविष्य के राजनयिक संबंध देश की संप्रभुता और घरेलू हितों की रक्षा पर निर्भर करेंगे।

जब उनसे मित्र देशों के जहाजों द्वारा चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल और क्या उन समझौतों को रद्द किया जाएगा इस बारे में पूछा गया तो मोनी ने कहा ‘हम समझौतों, यानी सभी 101 MoU की समीक्षा कर रहे हैं। आपको इसका नतीजा बहुत जल्द, बहुत जल्द मिल जाएगा।’ हालांकि मोनी ने यह साफ नहीं किया कि कौन से समझौते लागू रहेंगे और किन्हें रद्द या उनमें बदलाव किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश की मौजूदा सरकार राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए कई अनैतिक समझौतों से पीछे हट रही है।
चट्टोग्राम पोर्ट से भारत को बाहर करने की तैयारी?
नूरुल इस्लाम मोनी ने पिछली सरकार के समय हुए अनुचित समझौतों का जिक्र किया जिनमें चट्टोग्राम बंदरगाह पर बांग्लादेशी जहाजों के बजाय विदेशी जहाजों को प्राथमिकता देने वाली बंदरगाह नीतियां भी शामिल थीं। BNP के मुख्य व्हिप ने जोर देकर कहा कि भविष्य के राजनयिक संबंध देश की संप्रभुता और घरेलू हितों की रक्षा पर निर्भर करेंगे।
बांग्लादेश के अखबार ‘द डेली ऑब्ज़र्वर’ की रिपोर्ट के मुताबिक मोनी ने दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित न किए जाने पर भारत के प्रति नाराजगी भी जाहिर की और इसे एक स्वतंत्र देश के लिए निराशाजनक बताया।
चट्टोग्राम पोर्ट भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण
आपको बता दें कि भारत बांग्लादेश के चट्टोग्राम यानि चटगांव पोर्ट का इस्तेमाल करता है और दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत भारत को इसके इस्तेमाल की स्थायी मंजूरी मिली हुई है। इस पोर्ट के जरिए भारत अपने मुख्य हिस्से जैसे कोलकाता से उत्तर-पूर्वी राज्यों तक सामान आसानी से और कम समय में भेजता है। भारत को अपने उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम में सामान भेजने के लिए पहले एक संकरे रास्ते से जाना पड़ता था जिसे ‘चिकन नेक’ या सिलिगुड़ी कॉरिडोर कहते हैं।



